ज़िंदगी का सफर - 💞हमसफ़र के साथ💞 "भाग 93"
सभी पूजा के लिए बैठे तभी अचानक से किआरा बोली
किआरा :- ओह नो हम इतनी बड़ी बात भूल कैसे गये
सभी असमंजस मे किआरा की तरफ देखने लगे की अब क्या हुआ, और ऐसी कोनसी चीज है जो वो भूल गई सब चीज तो परफेक्ट है पूजा से लेकर खाने तक हर चीज फिर क्या रह गया ।
इवान भी असमंजस मे किआरा कि तरफ देख रहा था कि उसे क्या हुआ, किआरा ने इवान की तरफ देखा तो इवान समझ गया किआरा क्या चाहती है, इवान ने अध्विक के कान मे कुछ कहा तो अध्विक वहा से उठकर गया और अपना लैपटॉप लेकर वापस आया, उसने लैपटॉप को एक टेबल पर रखा और फिर वापस अपनी जगह पर आ गया तो सबने देखा लैपटॉप पर वीडियो कॉल के जरिये आन्या, राहुल ओर लिटिल आन्या दिख रही थी, सब मुस्कुरा दिये ओर समझ गये क्यू किआरा ने ये कहा कि वो कुछ भूल गई है, क्युकी पूजन ने घर के सभी सदस्य मौजूद थे सिर्फ आन्या, राहुल और लिटिल आन्या को छोड़कर ।
पंडित जी ने फिर पूजन शुरु की, किआरा ने वन्या और उत्कर्ष के साथ साथ लिटिल आन्या और आध्या के होने वाले बच्चे के नाम से भी वो पूजा रखवाई थी, कुछ ही देर आरती के बाद पूजन संपन्न हुई तो सभी ने भगवान को प्रणाम किया, किआरा अध्विक और इवान ने मिलकर सबको आरती, प्रसाद और पंचामृत ( दूध, दही, चीनी, मधु घी के मिश्रण से बना घोल ) दिया फिर खुद भी लिया, सबने कुछ देर आन्या और राहुल से बात की फिर फोन कट कर दिया, सब अब आपस मे बाते करने लगे, पंडित जी को उनकी दक्षिणा और सीदा ( हमारे यहां जब पंडित जी अन्य किसी औरत के हाथ का भोजन नही करते तो उसे सीदा देते हैं, अगर कोई कुंवारी कन्या हो तो वो बना सकती हैं वरना पंडित जी खुद बनाते हैं, और अगर ना हो तो देते हैं सीदा, सीदा उसे कहते है जो पंडित जी को आटा, नमक, दाल, चावल, मसाला अर्थात भोजन बनने के लिए जो चीजे चाहिए वो देते है उसे सीदा कहते हैं, साथ ही बस्त्र और कुछ पैसे भी देते हैं, अब आपके यहां ये सब होता हैं या नहीं ये हमे नही पता, किसी के यहां इसको कुछ और कहते हैं तो आप बता सकते हैं ) दी तो वो चले गये
किआरा ने शांता को भेज कन्याओ को बुलवा लिया था, सबने मिलकर कन्याओ को भोजन करवाया फिर उन्हे गिफ्ट देकर विदा किया और फिर इवान किआरा और अध्विक ने सभी बड़ो को भोजन करने के लिए बिठाया, उनके साथ आध्या को भी बिठाया क्युकी वो प्रेग्नेंट थी तो उसे समय से खाना खाना जरूरी था, साथ ही साथ घर के सभी नौकर के परिवार वालों को भी बिठाया, सभी परिवार वाले उनके साथ ही हॉल मे नीचे बैठकर खाना खाने लगे, सभी नौकरो के परिवार वाले उन्हे इस तरह उनके साथ नीचे जमीन पर बैठकर खाना खाते देख भावुक हो गये क्युकी उन्होंने ऐसा पहली बार देखा था जहा मालिक नौकर के साथ बैठकर खाना खा रहे हो, वरना कुछ लोग तो जानबूझ कर उन्हे नीचा दिखाते हैं ।
जब उन सबका खाना हो गया तो उन्हे भी गिफ्ट देकर विदा किया, सभी उन्हे दुआएं देते हुए चले गये, घर के बाकी सदस्य और सभी नौकर भी बैठ गये खाना खाने ।
सबका भोजन होने के बाद उन्हे भी गिफ्ट दिये फिर सभी मंदिर चले गये वहा मंदिर के बाहर मौजूद सभी लोगो को खाना और गिफ्ट देने ।
इवान और अध्विक ने कुछ अनाथ आश्रम और वृद्धाश्रम मे जाकर भी गिफ्ट दिये फिर घर आ गये, इतना सब करने मे दोपहर हो चली थी, सब थक गये थे तो सभी अपने अपने रूम मे चले गये आराम करने, दिलीप जी, गौरी जी, तन्वी, दर्श और आध्या को वही रुक लिया था और उन्हे भी अपने अपने रूम मे भेज दिया आराम करने ।
किआरा ने अध्विक के हाथो राहुल और आन्या के लिए भी खाना भिजवा दिया था
जब सब लोग अपने अपने रूम मे आराम करने गये थे तब इवान किआरा के पास आया और बोला
इवान :- वाइफी अब आप भी आराम कर लीजिये सुबह से काम कर रही हैं थक गई होगी
किआरा :- नही इवान जी अभी हम आराम नही कर सकते अभी तो शाम की पार्टी की तैयारियां बाकी हैं, अगर हम भी आराम करने चले गये तो वो सब कौन करेगा
इवान :- मै हु ना मै कर दूंगा, आप थोड़ी देर आराम कीजिये
वो दोनो बाते कर ही रहें थे की तभी दर्श और तन्वी आये और बोले
दर्श :- हाँ दी हम भी हैं, हम दोनो भी आपकी मदद करेंगे
किआरा :- अरे दर्श तुम यहां क्या कर रहें हो, तुम्हे आध्या के पास होना चाहिए था ना आध्या अकेली होगी रूम मे, अगर उसे किसी चीज की जरूरत हुई तो
दर्श :- रिलेक्स दी आध्या दादी के साथ हैं उनके रूम मे इसलिए मै आपके पास आ गया, अब आप जाइये थोड़ी देर आराम कीजिये तब तक हम ये सब करवाते हैं ओके
तन्वी ( दर्श की हा मे हा मिलाते हुए ) :- हाँ दी हम हैं ना आप जाइये वन्या और उत्कर्ष को भी ले जाइये वो दोनो भी सो गये हैं
सबके बारे बार कहने पर किआरा रूम मे चली गई वन्या और उत्कर्ष को लेकर आराम करने पर आधे घंटे बाद ही वापस आ गई, सभी उसे देख मुस्कुरा दिये क्युकी वो जानते थे किआरा से आराम करना नही हो पायेगा
लगभग एक घंटे बाद सुमित्रा जी और पायल जी नीचे आई वो भी उन सब की हेल्प करवाने लगी और जो लोग तैयारी कर रहे थे उन्हे इंस्ट्रक्शन देने लगी की कोनसी चीज कहा लगानी हैं और कैसे लगानी हैं, फिर कुछ चीजे लेने के लिए वो दोनो मार्केट चली गई ।
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शाम को पार्टी के लिए सभी तैयार होकर नीचे आये, सभी ने देखा किआरा और इवान ने मिलकर बहुत ही अच्छी डेकोरेशन करवाई थी, चारो तरफ वाइट और ब्लू कलर के कॉम्बिनेशन मे फ्लावर्स, बलूंस और पर्दों से सजावट हुई थी, हॉल मे वन्या और उत्कर्ष की फोटो के स्टेचू भी रखे हुए थे, नीचे जमीन पर धुआँ था जो ये फीलिंग दे रहें थे जैसे सब बदलो पर हो, जो वहा की खूबसूरती मे चार चांद लगा रहें थे
सभी एक से बढ़कर एक तैयार हुए थे, किआरा ने वन्या और उत्कर्ष को बहुत ही खूबसूरती से तैयार किया था, जहा वन्या ने ब्लू कलर की फ्रॉक पहनी हुई थी वही उत्कर्ष ने वाइट शर्ट, ब्लू पेंट और उसके ऊपर ब्लू कोट पहना हुआ था, दोनो ही बहुत प्यारे लग रहे थे
किआरा ने भी ब्लैक बॉर्डर के साथ ब्लू कलर की साड़ी पहनी हुई थी जो उसपर बहुत फव रही थी तो वही इवान ने भी उत्कर्ष जैसे वाइट शर्ट के साथ ब्लू पेंट और ब्लू कोट कैरी किया था
इवान और किआरा वन्या और उत्कर्ष को अपने साथ लेकर नीचे आये तो सभी उन्हे देख मुस्कुरा दिये क्युकी वो चारो एक परफेक्ट फॅमिली लग रहें थे, सभी ने फिर वन्या और उत्कर्ष को जन्मदिन की बधाईया दी और उन्हे ढेर सारा प्यार किया ।
उन लोगो ने ज्यादा मेहमानों को नही बुलाया था इसलिए वहा सिर्फ परिवार वाले ही थे, सुजीत जी और अजय जी की बहन और दादी की बेटी सुनंदा जी भी आई थी अपने पति अभिनव के साथ, उनके साथ उनकी बेटी मीत और छोटा बेटा अवनीश भी थे, वो दोनो वन्या और उत्कर्ष के साथ जाकर खेलने लगे
सुनंदा जी के साथ ही कुछ और लोग भी थे जिनके साथ एक लड़की थी, सुनंदा जी ने उन्हे उनके पड़ोसी के रूप मे परिचय करवाया तो सभी समझ गये की दादी हॉस्पिटल मे जिस लड़की की बात कर रही थी अध्विक के लिए वो यही लड़की हैं, जिसका नाम आशी था, सभी को वो लड़की बहुत पसंद आई, दादी ने ही सुनंदा जी से कहकर उन्हे अपने साथ लाने को कहा था
फिलहाल अध्विक किआरा के कहने पर केक लेने बाहर गया हुआ था इसलिए यहां क्या हो रहा हैं इस बात का अंदाजा उसे नही था
कुछ देर बाद अध्विक केक लेकर आया और उसे वही सबके बीच मौजूद टेबल पर रख दिया, तीन मंजिला केक बहुत सुंदर था जिसके टॉप पर एक फैमिली पिक्चर लगी हुई थी, किआरा ने केक पर वन्या ओर उत्कर्ष की फोटो नही लगवाई थी क्युकी वो नही चाहती थी की उनकी फोटो पर चाकू चले भले वो सिर्फ केक ही क्यू ना हो, इसलिए उसने फैमिली पिक्चर तो टॉप पर लगवाया था
सभी केक कटिंग के लिए आने लगे तो अध्विक जल्दी से गया ओर हॉल मे मौजूद टीवी को अपने मोबाइल से कनेक्ट कर राहुल को वीडियो कॉल कर दिया, टीवी की उस बड़ी सी स्क्रीन पर सभी को राहुल, आन्या ओर लिटिल आन्या दिखने लगी जो खुशी से सब कुछ देख रही थी, दादी ने आन्या से आशी और उसके परिवार वालों से मिलवाया
दादी :- आन्या बेटा इनसे मिलो ये हैं आशी के माँ और पापा और ये हैं आशी जिसे मेने अध्विक के लिए पसंद किया हैं
आन्या ( खुशी से ) :- वाह दादी आपने तो भैया के लिए बहुत ही प्यार लड़की ढूंढ़ी हैं, आशी जी आप बहुत प्यारी हो, अब तो बस जल्दी से रिस्ता पक्का हो और आप मेरी भाभी बन जाओ, वाओ आय एम वैरी एक्साइटेड
सभी आन्या की बात सुन मुस्कुरा दिये वो लोग अभी आन्या से बात कर ही रहें थे कि तभी डोर बेल बजी, सबने दरवाजे की तरफ देखा तो वहा मौजूद शख्स को देख इवान और किआरा हैरान हो गये और एक दूसरे को देखने लगे ।
To be continued.......................
थैंक्यू सो मच आप सभी को मेरी स्टोरी पढ़ने के लिए।
इसी तरह आप सब मेरी स्टोरी पढ़ते रहिये और कमेंट
Gunjan Kamal
20-Jan-2023 04:27 PM
बेहतरीन भाग 👏👌
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Mahendra Bhatt
13-Jan-2023 10:18 AM
शानदार भाग
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अदिति झा
12-Jan-2023 04:09 PM
Nice part 👌
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